उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHat lifafe mein ghair ka nikla

ख़त लिफ़ाफ़े में ग़ैर का निकला

خط لفافے میں غیر کا نکلا

शायर: Fahmi Badayuni4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़त लिफ़ाफ़े में ग़ैर का निकला
उस का क़ासिद भी बे-वफ़ा निकला

जान में जान आ गई यारो
वो किसी और से ख़फ़ा निकला

शेर नाज़िम ने जब पढ़ा मेरा
पहला मिस्रा ही दूसरा निकला

फिर उसी क़ब्र के बराबर से
ज़िंदा रहने का रास्ता निकला