उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHalwaton se nibah kar aaya

ख़ल्वतों से निबाह कर आया

خلوتوں سے نباہ کر آیا

शायर: Jai Raj Singh Jhala6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ल्वतों से निबाह कर आया
ज़िंदगी को तबाह कर आया

रौशनी के थे सब मुरीद सो मैं
तीरगी से निकाह कर आया

बे-सबब सर धरा गया इल्ज़ाम
इस लिए मैं गुनाह कर आया

उस को देखा भी तो नहीं मैं ने
कोह का फ़ख़्र काह कर आया

ज़िक्र कर यारों में मोहब्बत का
जंग की इफ़्तिताह कर आया

देख कर मुझ को तंज़ कस रहे थे
हँस के मैं वाह-वाह कर आया