उर्दू शायरी · ग़ज़ल

in se mil kar bhi bhala kya kijiye

इन से मिल कर भी भला क्या कीजिए

ان سے مل کر بھی بھلا کیا کیجئے

शायर: Jai Raj Singh Jhala5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इन से मिल कर भी भला क्या कीजिए
पास बैठे और शिकवा कीजिए

जाइए उन से कहीं दूर और फिर
दूर रहने का इशारा कीजिए

वो मनाने गर क़रीब आ जाए तो
बे-रुख़ी में और इज़ाफ़ा कीजिए

ज़िंदगी से क्या परेशाँ हो गए
ख़ल्वतों में जा के चीख़ा कीजिए

कब तलक बरताव में तल्ख़ी रहे
आदतों का अब मुदावा कीजिए