उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bandagi mein jo habibon ki raha sar mera

बंदगी में जो हबीबों की रहा सर मेरा

بندگی میں جو حبیبوں کی رہا سر میرا

शायर: Jai Raj Singh Jhala4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बंदगी में जो हबीबों की रहा सर मेरा
थोपने के लिए इल्ज़ाम मिला सर मेरा

जानते थे तो भी हालत का सबब जानना था
सर झटकते हुए मैं ने भी कहा सर मेरा

रूह का मेरी न जाने था इरादा क्या ही
सुब्ह जब मैं उठा तो सोया मिला सर मेरा

सौ ज़बाँ पर सौ तरीक़े मिरी इक दास्ताँ के
सौ सरों में है सौ हिस्सों में बटा सर मेरा