उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHalish baKHshi tapish baKHshi gudaz apna diya maine

ख़लिश बख़्शी तपिश बख़्शी गुदाज़ अपना दिया मैं ने

خلش بخشی تپش بخشی گداز اپنا دیا میں نے

शायर: Ehsan Darbhangavi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़लिश बख़्शी तपिश बख़्शी गुदाज़ अपना दिया मैं ने
मिज़ाज-ए-हुस्न को भी कर दिया ग़म-आश्ना मैं ने

ख़िरद ने चारासाज़ी की जुनूँ ने रहनुमाई की
बड़ी मुश्किल से पाया साया-ए-ज़ुल्फ़-ए-रसा मैं ने

ख़जिल हूँ मैं कि एहसास-ए-फ़राग़त छीन कर तुम से
ग़म-ए-आराइश-ए-काकुल तुम्हें क्यों दे दिया मैं ने

हवाएँ तुंद मौसम ना-मुवाफ़िक़ बाग़बाँ बरहम
अजब आलम में रक्खी है नशेमन की बिना मैं ने

इलाज-ए-दर्द-ए-दिल मुश्किल था लेकिन हो गया आसाँ
मोहब्बत को ख़ुदी का इक नया नुस्ख़ा दिया मैं ने

मैं कहता था कि अक़्ल-ओ-इश्क़ में रिश्ता नहीं मुमकिन
मगर अब सोचता हूँ ये गरेबाँ क्यों सिया मैं ने

ख़ुदा का शुक्र है 'एहसान' इस दौर-ए-तनफ़्फ़ुर में
फ़राहम कर लिए हैं चंद अरबाब-ए-वफ़ा मैं ने