उर्दू शायरी · ग़ज़ल

khaDe hain samne ahbab ajgaron ki tarah

खड़े हैं सामने अहबाब अजगरों की तरह

کھڑے ہیں سامنے احباب اجگروں کی طرح

शायर: Balraj Hairat10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

खड़े हैं सामने अहबाब अजगरों की तरह
बुला रहा है बयाबाँ खुले दरों की तरह

सुबुक-ख़िराम तनाज़ुर मुक़द्दरों की तरह
फ़राज़-ए-वक़्त पे क्या है कटे सरों की तरह

वो शख़्स इतना ही प्यासा भी होगा अंदर से
हिलोरे ले तो रहा है समुंदरों की तरह

ख़ला में डूब न जाऊँ कहीं महक बन कर
मुझे समेट लो आँखों में मंज़रों की तरह

शिकस्त-ए-ख़्वाब की आवाज़-ए-बाज़गश्त हूँ मैं
मुझे सँभल के बरतना मुहावरों की तरह

न जाने कौन है ख़ालिक़ इन आबगीनों का
ख़याल ज़ेहन में आते हैं पैकरों की तरह

अब और ही कोई दुनिया मुझे 'अता फ़रमा
बिसात-ए-दश्त भी महदूद है घरों की तरह

अमाँ मिलेगी मुझे बहर-ओ-बर में जाने कहाँ
गिरा हूँ टूट के उड़ते हुए परों की तरह

झिंझोड़ मत मुझे ऐसे में कर्ब-ए-नीम-शबी
नवा-ए-'मीर' भी चुभती है नश्तरों की तरह

कमाल-ए-‘अस्र है बे-चेहरगी मगर 'हैरत'
सुख़नवरों से तो मिलिए सुख़नवरों की तरह