उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaun si wo shama thi jis ka main parwana hua

कौन सी वो शम्अ' थी जिस का मैं परवाना हुआ

کون سی وہ شمع تھی جس کا میں پروانہ ہوا

शायर: Pandit Jagmohan Nath Raina Shauq7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कौन सी वो शम्अ' थी जिस का मैं परवाना हुआ
और फिर लौ भी लगी ऐसी कि दीवाना हुआ

साक़ी-ए-सर-मस्त से जब तक कि लेने को बढ़ूँ
हाथ से गिरते ही चकना-चूर पैमाना हुआ

दिल हरीम-ए-नाज़ से ले कर तो हम निकले मगर
हो गया आलम कुछ ऐसा सब से बेगाना हुआ

ख़ैर थी उल्फ़त में दिल ने रंग कुछ बदला न था
अब तमाशा देखिएगा वो भी दीवाना हुआ

हम ने जाने क्या कहा लोगों ने क्या समझा उसे
सरगुज़िश्त-ए-दर्द-ए-दिल थी जिस का अफ़्साना हुआ

फ़ैज़ साक़ी ने बदल दी सूरत-ए-दिल और ही
पहले पैमाना था पैमाना से मय-ख़ाना हुआ

मेरे लब तक आते आते क्यूँ छलक जाता है 'शौक़'
जाम-ए-रंगीं साग़र-ए-मुल या कि पैमाना हुआ