उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil mein agar na ishq-o-mohabbat ki chah ho

दिल में अगर न इश्क़-ओ-मोहब्बत की चाह हो

دل میں اگر نہ عشق و محبت کی چاہ ہو

शायर: Pandit Jagmohan Nath Raina Shauq7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल में अगर न इश्क़-ओ-मोहब्बत की चाह हो
नाला न दर्द हो न फ़ुग़ाँ हो न आह हो

रुस्वा न ए'तिबार-ए-तग़ाफ़ुल को कीजिए
क्या फ़ाएदा कि पुर्सिश-ए-दिल गाह गाह हो

दुश्मन से पूछता हूँ निशान-ए-हरीम-ए-नाज़
मेरी तरह से कोई न गुम-कर्दा-राह हो

राह-ए-जुनूँ में मुझ को किसी से नहीं है काम
बस मैं हूँ और इक दिल-ए-शोरिश-पनाह हो

कर अब तू फ़िक्र हुस्न-ए-अमल कूच है क़रीब
रस्ता कठिन है साथ में कुछ ज़ाद-ए-राह हो

तौहीन-ए-शान अफ़्व है इस्याँ से इज्तिनाब
या'नी गुनाहगार है जो बे-गुनाह हो

दुनिया में ऐसे लोगों से पाला पड़े न 'शौक़'
ज़ाहिर हो जिन का साफ़ तो बातिन सियाह हो