उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil se puchho kya hua tha aur kyun KHamosh tha

दिल से पूछो क्या हुआ था और क्यूँ ख़ामोश था

دل سے پوچھو کیا ہوا تھا اور کیوں خاموش تھا

शायर: Pandit Jagmohan Nath Raina Shauq10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल से पूछो क्या हुआ था और क्यूँ ख़ामोश था
आँख महव-ए-दीद थी इतना मुझे बस होश था

वो भी क्या तासीर थी जिस ने हिलाए सब के दिल
क्या बताऊँ वो मिरा ही नाला-ए-पुर-जोश था

महफ़िल-ए-साक़ी में था कुछ और ही मस्तों का रंग
कोई साग़र ढूँढता था और कोई बेहोश था

क्या 'अजब है जाएज़ा ले मय-परस्तों का कोई
याद रखना साक़िया मुझ सा भी इक मय-नोश था

क्या समझ सकता था कोई तेरे दीवाने की चुप
जब किसी ने उस से कुछ पूछा तो बस ख़ामोश था

बे-ख़ुदी से नश्शा-ए-जाम-ए-ख़ुदी उतरा तो फिर
एक ही साग़र मिला ऐसा कि मैं मदहोश था

इक हमीं को साक़िया पूछा न तू ने दौर मैं
वर्ना मय-ख़ाने में तेरे शोर नोशा-नोश था

किस क़दर था इश्तियाक़-ए-मंज़िल-ए-मक़्सूद उसे
मरने वाले का जनाज़ा आज दोशा-दोश था

ज़िंदगी-भर के गुनाहों से ये थी शर्म ऐ अजल
तारिक-ए-हस्ती यहाँ से जब चला रू-पोश था

ग़ुंचे क्यूँ ख़ामोश आए गुलशन-ए-हस्ती में 'शौक़'
मौसम-ए-गुल से मगर ख़ौफ़-ए-ख़िज़ाँ हम-दोश था