उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bataen kya ki aae hain kahan se hum kahan ho kar

बताएँ क्या कि आए हैं कहाँ से हम कहाँ हो कर

بتائیں کیا کہ آئے ہیں کہاں سے ہم کہاں ہو کر

शायर: Pandit Jagmohan Nath Raina Shauq8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बताएँ क्या कि आए हैं कहाँ से हम कहाँ हो कर
निशाँ अब ढूँडते-फिरते हैं घर का बे-निशाँ हो कर

लुभाने को दिल-ए-शैदा के सारी पर्दा-दारी थी
अयाँ हो तुम निहाँ हो कर निहाँ हो तुम अयाँ हो कर

हमारी ख़ाक के ज़र्रे फ़ना हो कर भी चमकेंगे
उरूज अपना दिखाएँ गे ये नज्म-ए-आसमाँ हो कर

दिल-ए-आवारा क्यूँ तुझ को ख़याल कू-ए-जानाँ है
अरे नादाँ कहाँ जा कर रहेगा बे-निशाँ हो कर

ये दौर-ए-मय-कशी हर-वक़्त महव-ए-दीद रखता है
कहाँ आँखों में ये ग़फ़लत रहे ख़्वाब-ए-गिराँ हो कर

मुसलमाँ हो के तर्क-ए-बुत-परस्ती ऐ मआ'ज़-अल्लाह
ख़ुदा को हम ने पहचाना है शैदा-ए-बुताँ हो कर

ये बार-ए-मासियत मंज़िल कड़ी और शाम-ए-तन्हाई
चले हैं क्या समझ कर हम भी रुस्वा-ए-जहाँ हो कर

अभी क्या जाने क्या क्या रंग वो ऐ 'शौक़' बदलेगा
ज़मीं पर इक करेगा हश्र बरपा आसमाँ हो कर