उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaun dil ka dard pahchane kise aawaz den

कौन दिल का दर्द पहचाने किसे आवाज़ दें

کون دل کا درد پہچانے کسے آواز دیں

शायर: Charan Singh Bashar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कौन दिल का दर्द पहचाने किसे आवाज़ दें
सोचते रहते हैं दीवाने किसे आवाज़ दें

इक तरफ़ अंधों की बस्ती इक तरफ़ पत्थर के लोग
देखिए अब आइना-ख़ाने किसे आवाज़ दें

दूर तक उम्मीद की कोई किरन बाक़ी नहीं
हो चुके अपने भी बेगाने किसे आवाज़ दें

आते आते मेरी गर्दन तक तो ख़ंजर आ गया
अब मिरे क़ातिल ख़ुदा जाने किसे आवाज़ दें

रेशमी ज़ुल्फ़ों का साया तो मुक़द्दर में नहीं
धूप में जलते हुए शाने किसे आवाज़ दें

कोई बस्ती में बशर जैसा नज़र आता नहीं
सख़्त उलझन में हैं वीराने किसे आवाज़ दें