उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaun dega tere kuche mein sada mere baad

कौन देगा तिरे कूचे में सदा मेरे बा'द

کون دے گا ترے کوچے میں صدا میرے بعد

शायर: Badr Muneer5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कौन देगा तिरे कूचे में सदा मेरे बा'द
सर को पटख़ेगी तिरे दर पे हवा मेरे बा'द

जो भी कहना है वो कह दे दम-ए-रुख़्सत ज़ालिम
रह न जाए तिरे होंटों पे गिला मेरे बा'द

अब यही सोच के मैं ज़ब्त किए बैठा हूँ
क्या किसी आँख से बरसेगी घटा मेरे बा'द

शाख़-ए-लर्ज़ीदा से पत्तों के बिछड़ने का समाँ
कौन देखेगा तमाशा ये भला मेरे बा'द

मेरे तो वहम-ओ-गुमाँ में भी नहीं था ये 'मुनीर'
ख़ुद से हो जाएगा वो शख़्स जुदा मेरे बा'द