उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kar rahe hain dawa KHayal kai

कर रहे हैं दवा ख़याल कई

کر رہے ہیں دوا خیال کئی

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कर रहे हैं दवा ख़याल कई
तेरे बीमार के हैं हाल कई

आहटें दस्तकें पुराने ख़त
हिज्र में होते हैं वबाल कई

सिर्फ़ आँखों के इक इशारे से
पूछ लेता है वो सवाल कई

ख़ूब झिकझिक हुई मछेरों में
एक मछली थी और जाल कई

सीख लो चाल क़ाबू में रखना
रास्ते में पड़ेंगे ढाल कई

उस की चौखट से उस के क़दमों तक
पहुँचने में लगे हैं साल कई

रूह के दश्त से लगा लाई
ज़िंदगी जान को वबाल कई

देख कर चल 'उरूज की जानिब
घात में बैठे हैं ज़वाल कई