उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kar gaya gosha-nashinon pe ye ehsan koi

कर गया गोशा-नशीनों पे ये एहसाँ कोई

کر گیا گوشہ نشینوں پہ یہ احساں کوئی

शायर: Ehsan Darbhangavi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कर गया गोशा-नशीनों पे ये एहसाँ कोई
दे गया मश्ग़ला-ए-चाक-गरेबाँ कोई

है यही शौक़ की पस्ती-ओ-बुलंदी का मिज़ाज
फ़र्श की गर्द कोई अर्श का मेहमाँ कोई

ज़ोफ़-ओ-हिम्मत के करिश्मे हैं चे मुमकिन चे मुहाल
काम मुश्किल है कोई और न आसाँ कोई

आज वो दिन है कि रौशन है शबिस्तान-ए-ख़याल
रोक दे बढ़ के ज़रा गर्दिश-ए-दौराँ कोई

ज़ुल्फ़-ओ-काकुल का फ़साना हो किसी तरह दराज़
इस ख़म-ओ-पेच में है सिलसिला-जुम्बाँ कोई

और भी ज़ख़्म हैं ऐ चाक-ए-गरेबान-ए-जुनूँ
तू हँसे या न हँसे होगा नुमायाँ कोई

ऐसे सहरा में जहाँ नख़्ल का साया भी न था
बढ़ गया छोड़ के तन्हा हमें 'एहसाँ' कोई