उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kamal-e-zauq-e-sajda is se baDh kar aur kya hoga

कमाल-ए-ज़ौक़-ए-सज्दा इस से बढ़ कर और क्या होगा

کمال ذوق سجدہ اس سے بڑھ کر اور کیا ہوگا (ردیف .. ے)

शायर: Om Prakash Laghar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कमाल-ए-ज़ौक़-ए-सज्दा इस से बढ़ कर और क्या होगा
वहीं वो नक़्श-ए-पा उभरा जहाँ रख दी जबीं मैं ने

मैं हर इक अजनबी को देख कर महसूस करता हूँ
कि शायद इस को देखा है कभी पहले कहीं मैं ने

बशर का है बशर दुश्मन ये कैसा दौर है यारो
मोहब्बत का चलन बिल्कुल नहीं देखा कहीं मैं ने

मिरी इक मुस्कुराहट पर ये दुनिया क्यों बिगड़ती है
कि मुद्दत तक बहुत आँसू बहाए हैं यहीं मैं ने

चमन में हर तरफ़ ज़ाग़-ओ-ज़ग़न का राज है 'लाग़र'
चमन में क़ुमरी-ओ-बुलबुल नहीं देखी कहीं मैं ने