उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kamal-e-admi ki intiha hai

कमाल-ए-आदमी की इंतिहा है

کمال آدمی کی انتہا ہے

शायर: Obaidullah Aleem8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कमाल-ए-आदमी की इंतिहा है
वो आइंदा में भी सब से बड़ा है

कोई रफ़्तार होगी रौशनी की
मगर वो उस से भी आगे गया है

जहाँ बैठे सदा-ए-ग़ैब आई
ये साया भी उसी दीवार का है

मुजस्सम हो गए सब ख़्वाब मेरे
मुझे मेरा ख़ज़ाना मिल गया है

हक़ीक़त एक है लज़्ज़त में लेकिन
हिकायत सिलसिला-दर-सिलसिला है

यूँही हैराँ नहीं हैं आँख वाले
कहीं इक आइना रक्खा हुआ है

विसाल-ए-यार से पहले मोहब्बत
ख़ुद अपनी ज़ात का इक रास्ता है

सलामत आइने में एक चेहरा
शिकस्ता हो तो कितना देखता है