उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kal raat KHwahishon ka byopar ho gaya tha

कल रात ख़्वाहिशों का ब्योपार हो गया था

کل رات خواہشوں کا بیوپار ہو گیا تھا

शायर: Uday Divakar Pandey6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कल रात ख़्वाहिशों का ब्योपार हो गया था
इस पार था जो हमदम उस पार हो गया था

पहले पहल तो उस की नज़रों में इक चुभन थी
जब बार बार देखा तो प्यार हो गया था

जब तक पढ़ा गया मैं तब तक वुजूद मेरा
सब के लिए मैं कल का अख़बार हो गया था

उस की वफ़ा में पल पल था क़त्ल का इरादा
इस बार बच गया मैं उस बार हो गया था

मत पूछ किस जतन से कैसे वो शब ढली जब
माह-ए-तमाम उन का दीदार हो गया था

देखो 'उदय' ने जल कर बस्ती उजाड़ डाली
बुझता चराग़ कितना लाचार हो गया था