उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni to ab apne dil se yari hai

अपनी तो अब अपने दिल से यारी है

اپنی تو اب اپنے دل سے یاری ہے

शायर: Uday Divakar Pandey4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी तो अब अपने दिल से यारी है
बाक़ी से बस केवल दुनिया-दारी है

इक मछली को सौ टुकड़ों में काट दिया
इक मछली पे इतनी मारा-मारी है

तुम ने हाथ गिराए गिनती कम कर दी
भाई ये तो हाकिम से ग़द्दारी है

रिश्वत का सिक्का भी कैसे रख लूँगा
यार 'उदय' घर में छोटी अलमारी है