उर्दू शायरी · ग़ज़ल

abhi hai raat abhi aur ek kahani hai

अभी है रात अभी और इक कहानी है

ابھی ہے رات ابھی اور اک کہانی ہے

शायर: Uday Divakar Pandey6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अभी है रात अभी और इक कहानी है
अभी तो मोम की आँखों में थोड़ा पानी है

ज़रूरतों में जलाते हैं फिर बुझाते हैं
किसी चराग़ के जैसी मिरी जवानी है

ये तेरी ज़ुल्फ़ें तिरी आँखें तेरे होंट सनम
ख़ुदा के हाथ की नायाब बाग़बानी है

ये जो हुनर है ग़म-ओ-रंज भूल जाने का
हमारी माँ की यही आख़िरी निशानी है

मैं अजनबी को ठिकाने पे छोड़ आता हूँ
मिरी रगों में अभी गाँव की रवानी है

पुराने लम्हे दिखे चाबियाँ घुमाने से
'उदय' के हाथ में लिपटी घड़ी पुरानी है