उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kal aasman jaise koi shola-zar tha

कल आसमान जैसे कोई शो'ला-ज़ार था

کل آسمان جیسے کوئی شعلہ زار تھا

शायर: Balraj Hairat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कल आसमान जैसे कोई शो'ला-ज़ार था
सूरज के डूबने में भी कितना वक़ार था

इस अंजुमन में छनती हमारी तो किस के साथ
कमज़ोरियों का नाम वहाँ इंकिसार था

होता भला न 'अर्श पे उस का दिमाग़ क्यों
आख़िर वो बर्ग-ए-ख़ुश्क हवाओं का यार था

हर चंद उस की आँच से रूहें झुलस गईं
जिस्मों का लम्स फिर भी बड़ा ख़ुश-गवार था

इतना भी कोई शख़्स न तन्हा हो ज़ीस्त में
सारा जहान रात मिरा ग़म-गुसार था

'हैरत' कुछ उस का हाल हमें भी सुनाइए
जिस बादा-कश को बादा-परस्ती से 'आर था