उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaise tewar hain ab hawa ke dekh

कैसे तेवर हैं अब हवा के देख

کیسے تیور ہیں اب ہوا کے دیکھ

शायर: Fahmi Badayuni9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कैसे तेवर हैं अब हवा के देख
घर से पहले दिया जला के देख

उस के ख़त में कोई दिलासा ढूँड
कोई जुमला घटा बढ़ा के देख

शह्र में ख़ाक तो मिलेगी नहीं
कोई अफ़्वाह ही उड़ा के देख

उन का दीवान कुछ तो काम आए
हाल-ए-दिल 'मीर' को सुना के देख

उस की महफ़िल में जाए रोता हुआ
नामा-बर को सिखा पढ़ा के देख

गर मिरा रक़्स देखना है तो
कुछ मिरे कान में बता के देख

उस की ख़ुश्बू कहीं गई तो नहीं
घर के पर्दे हिला हिला के देख

आइने रहम-दिल भी होते हैं
शर्त यह है कि सर झुका के देख

हँसते हैं या उदास होते हैं
पास वालों को दूर जा के देख