उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahun dost se dost ki baat kya kya

कहूँ दोस्त से दोस्त की बात क्या क्या

کہوں دوست سے دوست کی بات کیا کیا

शायर: Zaheen Shah Taji7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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कहूँ दोस्त से दोस्त की बात क्या क्या
रही दुश्मनों से मुलाक़ात क्या क्या

वो 'इश्वे वो ग़म्ज़े वो नग़्मे वो जल्वे
तलब कर रहे हैं हम आफ़ात क्या क्या

जहाँ मुझ को आया ख़याल आ गए वो
दिखाई हैं दिल ने करामात क्या क्या

न थी गुफ़्तुगू दरमियाँ फिर भी उन से
पस-ए-पर्दा-ए-दिल हुई बात क्या क्या

तिरी ज़ुल्फ़-ओ-रुख़सार के धूप साए
मुझे याद आते हैं दिन रात क्या क्या

ये हिचकी ये आँसू ये आहें ये नाले
मिली हैं मोहब्बत में सौग़ात क्या क्या

उलट कर नक़ाब-ए-सिफ़ाती जो देखा
'ज़हीन' आप थे जल्वा-ए-ज़ात क्या क्या