उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahne lage daraKHt sahaara koi to ho

कहने लगे दरख़्त सहारा कोई तो हो

کہنے لگے درخت سہارا کوئی تو ہو

शायर: Nadeem Bhabha6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहने लगे दरख़्त सहारा कोई तो हो
वो धूप पड़ रही है कि साया कोई तो हो

सोचा था कट ही जाएगी तन्हा तमाम 'उम्र
लेकिन तमाम 'उम्र ख़ुदारा कोई तो हो

इक 'उम्र तुझ से मिल न सके और एक 'उम्र
ये सोचते कटी कि बहाना कोई तो हो

तन्हाई इस क़दर है कि 'आदत सी हो गई
हर वक़्त कहते रहना हमारा कोई तो हो

कुछ इस लिए भी मुझ को मोहब्बत है तुम से दोस्त
मेरा कोई नहीं है तुम्हारा कोई तो हो

कमरे में आज मेरे 'अलावा कोई नहीं
कमरे में आज मेरे 'अलावा कोई तो हो