उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahin unwan badla hai kahin tarz-e-bayan badla

कहीं 'उन्वान बदला है कहीं तर्ज़-ए-बयाँ बदला

کہیں عنوان بدلا ہے کہیں طرز بیاں بدلا

शायर: Zaheen Shah Taji6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहीं 'उन्वान बदला है कहीं तर्ज़-ए-बयाँ बदला
अज़ल से ता-अबद अफ़्साना-ए-हस्ती कहाँ बदला

मकीं बदले मकाँ बदला ज़मीं बदली ज़माँ बदला
न बदले हुस्न-ओ-उलफ़त हाँ ज़मीन-ओ-आसमाँ बदला

बदलने को हज़ारों करवटें बदलीं ज़माने ने
मगर मेरी जबीं बदली न तेरा आस्ताँ बदला

लिबास-ए-नौ-बनौ हर दौर में बदले हैं दोनों ने
न इश्क़-ए-सरमदी बदला न हुस्न-ए-जावेदाँ बदला

वही पहला तबस्सुम आज तक है हुस्न के लब पर
वही पहली फ़ुग़ान-ए-‘इश्क़ है जिस से जहाँ बदला

तग़य्युर से बरी हुस्न-ओ-मोहब्बत की गुल-अफ़्शानी
गराँ गुज़री ज़माने पर ज़माना सर-गराँ बदला