उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahin se jab koi aawaz aai

कहीं से जब कोई आवाज़ आई

کہیں سے جب کوئی آواز آئی

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहीं से जब कोई आवाज़ आई
मैं ये समझा तिरी आवाज़ आई

वहाँ तक हम ने दीवारें गिरा दीं
जहाँ तक आप की आवाज़ आई

हुआ होगा कहीं पर शोर कोई
हमें तो बस तिरी आवाज़ आई

कहा मैं ने ज़रा पानी पिला दे
कुएँ से भी यही आवाज़ आई

समा'अत पर जुनूँ था इतना हावी
जो सोची थी वही आवाज़ आई

उसी की गूँज है मेरी ख़मोशी
तिरी जो आख़िरी आवाज़ आई

अचानक रात में भी चौंक उठ्ठा
बहुत दिन में मिरी आवाज़ आई