उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahan wo sim-tanan hain kahan wo gul-badanan

कहाँ वो सीम-तनाँ हैं कहाँ वो गुल-बदनाँ

کہاں وہ سیم تناں ہیں کہاں وہ گل بدناں

शायर: Habab Hashmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहाँ वो सीम-तनाँ हैं कहाँ वो गुल-बदनाँ
अज़ीज़-अज़-दिल-ओ-जाँ है हदीस-ए-लाला-रुख़ाँ

ये हम से पूछो जलाल-ओ-जमाल क्या शय है
हमारे गिर्द रहा है हुजूम-ए-माह-वशाँ

मिरी निगाह को है दीद की कहाँ फ़ुर्सत
हैं यूँ तो जल्वे ही जल्वे फ़ज़ा में रक़्स-कुनाँ

सुकूँ है कार-गह-ए-ज़ीस्त में कहाँ यारो
कशाँ-कशाँ लिए फिरती है गर्दिश-ए-दौराँ

यहाँ तो साँस भी लेने में एहतियात है शर्त
ब-क़ौल 'मीर' ये है कार-गाह-ए-शीशा-गराँ

'हबाब' अपने वतन से तो दूर हूँ लेकिन
निगाह में हैं सभी दोस्तान-ए-ज़िंदा-दिलाँ