उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab misr mein kahan koi bazar moatabar

अब मिस्र में कहाँ कोई बाज़ार मो'तबर

اب مصر میں کہاں کوئی بازار معتبر

शायर: Habab Hashmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब मिस्र में कहाँ कोई बाज़ार मो'तबर
यूसुफ़ ही मो'तबर न ख़रीदार मो'तबर

ऐसे में सोचता हूँ किसे मो'तबर कहूँ
मिलता नहीं है जब कोई किरदार मो'तबर

रहज़न छुपे हुए हैं पस-ए-संग-ए-मील-ए-राह
मुतलक़ नहीं है साया-ए-अश्जार मो'तबर

तारीक शब है और लरज़ते हुए चराग़
लगते नहीं हैं सुब्ह के आसार मो'तबर

कहने को सरफ़रोश थे जाँबाज़ थे बहुत
ठहरे अकेले हम ही सर-ए-दार मो'तबर

महफ़िल में अहल-ए-फ़न भी ये कहने लगे 'हबाब'
पुख़्ता तिरा सुख़न तिरे अशआ'र मो'तबर