उर्दू शायरी · ग़ज़ल

had-e-junun se bhi aage gae hain diwane

हद-ए-जुनूँ से भी आगे गए हैं दीवाने

حد جنوں سے بھی آگے گئے ہیں دیوانے

शायर: Habab Hashmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हद-ए-जुनूँ से भी आगे गए हैं दीवाने
मिलेगी मंज़िल-ए-मक़्सूद कब ख़ुदा जाने

किए हैं तू ने मुनव्वर दिलों के काशाने
तिरे वजूद से आबाद हैं सनम-ख़ाने

जो तुम न थे तो बहारें ख़िज़ाँ से बद-तर थीं
तुम आ गए तो चमन बन गए ये वीराने

शब-ए-फ़िराक़ हुजूम-ए-ग़म-ओ-अलम के तुफ़ैल
तुम्हारी याद चली आई दिल को बहलाने

तमाम उम्र रही यूँ ही चाक-दामानी
चले हैं अहल-ए-ख़िरद आज मुझ को समझाने

'हबाब' अश्क-ए-नदामत हैं उन की आँखों में
क़ुबूल कीजे ख़ुलूस-ओ-वफ़ा के नज़राने