उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahan jazbaat mein hum bah rahe hain

कहाँ जज़्बात में हम बह रहे हैं

کہاں جذبات میں ہم بہہ رہے ہیں

शायर: Naeem Najmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहाँ जज़्बात में हम बह रहे हैं
जो कहना था वही तो कह रहे हैं

किसी से क्या गिला शिकवा करें हम
ये दुख विर्से के हैं जो सह रहे हैं

बचा सकते हो तो इस को बचा लो
मकाँ इंसानियत के ढह रहे हैं

हुए हैं कब अभी आपे से बाहर
अभी हम अपने अन्दर रह रहे हैं

ज़माना हो रहा है क्यूँ मुख़ालिफ़
तुम्हें अपना अगर हम कह रहे हैं

यहाँ इंसान है इंसाँ का दुश्मन
ये किस दुनिया में हम अब रह रहे हैं