उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahan hawa ke muKhaalif hain baadban kaho

कहाँ हवा के मुख़ालिफ़ हैं बादबान कहो

کہاں ہوا کے مخالف ہیں بادبان کہو

शायर: Vazahat Nseem9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहाँ हवा के मुख़ालिफ़ हैं बादबान कहो
कहीं मिले हैं मोहब्बत को साएबान कहो

न गुल कहो न सितारा कहो न जान कहो
मैं एक लम्हा हूँ मुझ को फ़क़त गुमान कहो

जो सूरतें नज़र आती हैं ख़्वाब-ए-हस्ती में
वो अस्ल में कभी होती हैं मेहरबान कहो

मैं मुनफ़रिद तो नहीं हूँ मगर तुम्हारा ग़म
पलक तक आने न दूँ मुझ को राज़दाँ कहो

वो एक शख़्स कि जो हासिल-ए-मोहब्बत है
उसी को वक़्त-ए-सुख़न हासिल-ए-बयान कहो

जो लौह-ए-दिल पे हैं महफ़ूज़ चंद तहरीरें
उन्ही हुरूफ़ में उल्फ़त की दास्तान कहो

हज़ार तरह तो हम लोग आज़माए गए
अब और कौन सा रहता है इम्तिहान कहो

सवाद-ए-शाम में शाइ'र-मिज़ाज लोग अगर
फ़सुर्दा-दिल नज़र आएँ तो शादमान कहो

'नसीम' सुब्ह-ए-तरब जब चमन में तुम आओ
गुलों की ताज़ा महक को ख़ुदा की शान कहो