उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kabhi na pahunchega nuqsan ishq ke hathon

कभी न पहुँचेगा नुक़सान इश्क़ के हाथों

کبھی نہ پہنچے گا نقصان عشق کے ہاتھوں

शायर: Ibrahim Noori9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कभी न पहुँचेगा नुक़सान इश्क़ के हाथों
मिलेगा दर्द का दरमान इश्क़ के हाथों

किसी के चाक-ए-गरेबाँ का ये रफ़ूगर है
है कोई चाक-गरेबान इश्क़ के हाथों

गवाही सुर्ख़ी-ए-ख़ून-ए-शहीद देती है
हुआ है सुर्ख़-रू इंसान इश्क़ के हाथों

हवस ने आग लगाई है गुल्सितानों में
बनी है आग गुलिस्तान इश्क़ के हाथों

ब-दस्त-ए-अक़्ल-ओ-ख़िरद ये सँवर न पाएगी
सँवारो ज़ुल्फ़-ए-परेशान इश्क़ के हाथों

हवस के हाथों ब-जुज़ इज़्तिराब कुछ न मिला
मिला सुकून का सामान इश्क़ के हाथों

शिकस्त-ए-फ़ाश से दो-चार हो रही है हवस
अभी तलक सर-ए-मैदान इश्क़ के हाथों

बना है मरकज़-ए-उश्शाक़-ओ-रश्क-ए-बाग़-ए-बहिश्त
ये कर्बला का बयाबान इश्क़ के हाथों

हवस के हाथों जो बदनाम होने वाला था
वो 'नूरी' हो गया ज़ीशान इश्क़ के हाथों