उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kabhi maine unhen puchha nahin hai

कभी मैं ने उन्हें पूछा नहीं है

کبھی میں نے انہیں پوچھا نہیں ہے

शायर: Pandit Vidya Ratan Aasi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कभी मैं ने उन्हें पूछा नहीं है
उन्हें भी है मोहब्बत या नहीं है

इजाज़त हो तो मैं ये अर्ज़ कर दूँ
सलीक़ा आप का अच्छा नहीं है

वही छाया हुआ है ज़िंदगी पर
वो जिस को आज तक देखा नहीं है

सितम आलाम महरूमी तबाही
मिरी तक़दीर में क्या क्या नहीं है

अभी कुछ और भी जौर-ओ-सितम हों
अभी सदमों से दिल टूटा नहीं है

न जाने किस घड़ी छिन जाए मुझ से
ये ज़ालिम जिस्म भी मेरा नहीं है

मिरी तक़दीर ही में ठोकरें थीं
मुझे दुनिया से कुछ शिकवा नहीं है

अजब इंसान है दुनिया में वो भी
सदा-ए-वक़्त जो सुनता नहीं है

कहाँ रहते हो 'आसी' आज-कल तुम
कई दिन से तुझे देखा नहीं है