उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kab tak rahega shab ka safar dekhna ye hai

कब तक रहेगा शब का सफ़र देखना ये है

کب تک رہے گا شب کا سفر دیکھنا یہ ہے

शायर: Charan Singh Bashar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कब तक रहेगा शब का सफ़र देखना ये है
है कितनी दूर और सहर देखना ये है

हर इक क़दम पे वक़्त बदल जाए है यहाँ
किस तरह तय करोगे सफ़र देखना ये है

बूढ़ा दरख़्त तेज़ हवाओं के सामने
कब तक रहेगा सीना-सिपर देखना ये है

होंटों पे खिल रहे हैं सदाक़त के चंद फूल
नेज़े पे कब बुलंद हो सर देखना ये है

दंगे में तो हलाक हुए बे-शुमार लोग
कल किस तरह छपेगी ख़बर देखना ये है

इंसानियत के नाम पे कब तक लड़ेंगे हम
कब तक बहेगा ख़ून-ए-'बशर' देखना ये है