उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kar-e-duniya ke taqazon ko nibhane mein kaTi

कार-ए-दुनिया के तक़ाज़ों को निभाने में कटी

کار دنیا کے تقاضوں کو نبھانے میں کٹی

शायर: Obaid Siddiqi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कार-ए-दुनिया के तक़ाज़ों को निभाने में कटी
ज़िंदगी रेत की दीवार उठाने में कटी

अब भी रौशन है तिरे दिल में मोहब्बत का दिया
रात फिर शम-ए-यक़ीं-साज़ जलाने में कटी

तिश्नगी वो थी कोई कार-ए-वफ़ा हो न सका
उम्र-ए-बे-माया फ़क़त प्यास बुझाने में कटी

साअत-ए-वस्ल जो देखे थे ख़द-ओ-ख़ाल तिरे
हिज्र की शब वही तस्वीर बनाने में कटी

एक अंगुश्त-ए-शहादत कि अभी बाक़ी थी
वो भी इस बार तिरी सम्त उठाने में कटी