उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaam aai nahin dawa mujhko

काम आई नहीं दवा मुझ को

کام آئی نہیں دوا مجھ کو

शायर: Yaqoob Dil5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

काम आई नहीं दवा मुझ को
आप देते रहो दु'आ मुझ को

उस ने कमज़ोरियों पे हँस हँस कर
कितना मज़बूत कर दिया मुझ को

चारागर ने उठा दिए हैं हाथ
तू ही दे अब कोई दवा मुझ को

हर तरफ़ रौशनी करूँगा मैं
चाँद कहती है वालिदा मुझ को

मेरे सब राज़ जान कर उस ने
कितना मजबूर कर दिया मुझ को