उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaya hun bas yahi batane ko

आया हूँ बस यही बताने को

آیا ہوں بس یہی بتانے کو

शायर: Yaqoob Dil5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आया हूँ बस यही बताने को
अब नहीं आउँगा मनाने को

पेड़ मा'ज़ूर कर दिए कितने
चंद बैसाखियाँ बनाने को

ख़ुद ही लड़ने लगे हैं आपस में
आए थे सुल्ह जो कराने को

और कितने करे गुनाह कोई
एक तेरे क़फ़स में आने को

लोग दानिस्ता डूब जाएँगे
आप आए अगर बचाने को