उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kafir kahen jise na musalman kahen jise

काफ़िर कहें जिसे न मुसलमाँ कहें जिसे

کافر کہیں جسے نہ مسلماں کہیں جسے

शायर: Raaz Muradabadi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

काफ़िर कहें जिसे न मुसलमाँ कहें जिसे
मैं उस को ढूँढता हूँ कि इंसाँ कहें जिसे

यादश-ब-ख़ैर वो थे कभी कज-कुलाह-ए-दिल
अब दिल है एक किश्वर-ए-वीराँ कहें जिसे

आलाम-ए-रोज़गार से रुकने लगा है दम
ग़म वो मता'-ए-ज़ीस्त है अर्ज़ां कहें जिसे

आसूदगी-ए-तर्क-ए-तमन्ना के बा-वजूद
बे-नाम सी ख़लिश है रग-ए-जाँ कहें जिसे

शाम-ए-फ़िराक़-ए-दीदा-ए-ख़ूँ-बार की क़सम
इक जश्न है कि जश्न-ए-चराग़ाँ कहें जिसे