उर्दू शायरी · ग़ज़ल

junun ne KHud se bhi be-zar kar diya hai mujhe

जुनूँ ने ख़ुद से भी बे-ज़ार कर दिया है मुझे

جنوں نے خود سے بھی بیزار کر دیا ہے مجھے

शायर: Naeem Najmi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जुनूँ ने ख़ुद से भी बे-ज़ार कर दिया है मुझे
मैं अच्छा ख़ासा था बीमार कर दिया है मुझे

भला मैं कैसे रह-ए-'इश्क़ से भटक जाऊँ
किसी ने पहले ही हुश्यार कर दिया है मुझे

अदब सिखाया था मुझ को तो शे'र-गोई ने
मुशा'इरों ने अदाकार कर दिया है मुझे

अब उस के कूचे में जाने से फ़ाएदा क्या है
जब उस ने मिलने से इंकार कर दिया है मुझे

वो जिस के प्यार में दीवाना हो गया हूँ मैं
उसी ने ज़ीस्त से बेज़ार कर दिया है मुझे

'अजीब नश्शा सा तारी है ज़ेहन-ओ-दिल पे मिरे
किसी के हुस्न ने सरशार कर दिया है मुझे

झुका हुआ है मिरा जिस की बारगाह में सर
उसी ने साहब-ए-दस्तार कर दिया है मुझे

मिरी अना की इस आवाज़ ने ही ऐ 'नजमी'
मिरे ख़िलाफ़ कई बार कर दिया है मुझे