उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo TukDon mein bikharte ja rahe ho

जो टुकड़ों में बिखरते जा रहे हो

جو ٹکڑوں میں بکھرتے جا رہے ہو

शायर: Faisal Qadri Gunnauri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो टुकड़ों में बिखरते जा रहे हो
तभी बे-मौत मरते जा रहे हो

तुम इतना क्यों सँवरते जा रहे हो
मिरे दिल में उतरते जा रहे हो

डुबोना चाहती है जितना दुनिया
तुम उतने ही उभरते जा रहे हो

तुम्हें क्या और कोई मिल गया है
मुझे इग्नोर करते जा रहे हो

तुम्हें शायद मोहब्बत हो गई है
ज़ियादा ही निखरते जा रहे हो

हमारी ज़िंदगी बे-रंग सी है
तुम्ही तो रंग भरते जा रहे हो

चलो बे-ख़ौफ़ इस रस्ते पे 'फ़ैसल'
ये तुम क्यों डरते डरते जा रहे हो