उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo tha hamara us pe bhi kis kis ka haq raha

जो था हमारा उस पे भी किस किस का हक़ रहा

جو تھا ہمارا اس پہ بھی کس کس کا حق رہا

शायर: Faisal Qadri Gunnauri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो था हमारा उस पे भी किस किस का हक़ रहा
हम को तमाम 'उम्र इसी का क़लक़ रहा

दिल बाग़-बाग़ चंद ही अय्याम रह सका
तर्क-ए-त'अल्लुक़ात से दिल बरसों शक़ रहा

क्यों आज थीं जनाब की बातों में तल्ख़ियाँ
क्यों आज रुख़ जनाब का मिस्ल-ए-शफ़क़ रहा

दुनिया के सारे क़ा'एदे क़ानून भूल कर
बस 'ऐन शीन क़ाफ़ हमारा सबक़ रहा

'फ़ैसल' उसी का चेहरा निगाहों में बस गया
जिस का ख़याल आँखों का मेरी हदक़ रहा