उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo tere dar nahin jate

जो तेरे दर नहीं जाते

جو تیرے در نہیں جاتے

शायर: Usama Masood Khokhar8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो तेरे दर नहीं जाते
वो क्यूँकर मर नहीं जाते

सभी जाते हैं उन के दर
मुझे ले कर नहीं जाते

मैं पूछूँ मुद्दतों से क्या
ये घाव भर नहीं जाते

बुरे ग़म भूल जाते हैं
मगर बद-तर नहीं जाते

बहारें ला नहीं सकते
ये बादल घर नहीं जाते

तिरी इंकार की 'आदत
हमारे डर नहीं जाते

हम आए बिन-बुलाए वो
बुलाने पर नहीं जाते

'उसामा' उन की महफ़िल में
उठा कर सर नहीं जाते