उर्दू शायरी · ग़ज़ल

husn tera jo is pe qahr bana

हुस्न तेरा जो इस पे क़हर बना

حسن تیرا جو اس پہ قہر بنا

शायर: Usama Masood Khokhar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुस्न तेरा जो इस पे क़हर बना
बे-सुकूँ सा ये सारा शहर बना

ख़ुश-निगाही से तेरी जाम बना
सर्द-मेहरी से तेरी ज़हर बना

वो जो ईंटें नज़र नहीं आतीं
उन से तन्हाइयों का शहर बना

तब ही पहुँचेगी ये किनारे पर
चाहे जैसी भी हो तू लहर बना

ये ले आँखें मिरी और उस का 'अक्स
ऐ मुसव्विर तू अब न ठहर बना