उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo pahchan aae to pahchan jae

जो पहचान आए तो पहचान जाए

جو پہچان آئے تو پہچان جائے

शायर: Zaheen Shah Taji8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो पहचान आए तो पहचान जाए
मुझे जान जाए तुम्हें जान जाए

मिरा दीन जाए कि ईमान जाए
वो मन जाए मुझ से मिरी मान जाए

अगर जान जाती है तो जान जाए
वो जान-ए-तग़ाफ़ुल मगर जान जाए

वो इंसान के दिल में जब घर बनाएँ
कहाँ घर बनाने को इंसान जाए

ये इंकार-ओ-इक़रार छोड़ो कि इन से
न ईमान आए न ईमान जाए

तुम्हारी तमन्ना को दिल से निकालें
कहाँ घर से बाहर ये मेहमान जाए

न हो तुम वहाँ तो जुनूँ से न होगा
कि बैठे बिठाए बयाबान जाए

'ज़हीन' उन को उन से अलग देखना है
जहाँ वो न आएँ वहाँ ध्यान जाए