उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo aae wo hisab-e-ab-o-dana karne wale the

जो आए वो हिसाब-ए-आब-ओ-दाना करने वाले थे

جو آئے وہ حساب آب و دانہ کرنے والے تھے

शायर: Zafar Gorakhpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो आए वो हिसाब-ए-आब-ओ-दाना करने वाले थे
गए वो लोग जो कार-ए-ज़माना करने वाले थे

उड़ाने के लिए कुछ कम नहीं है ख़ाक घर में भी
वो मौसम ही नहीं हैं जो दिवाना करने वाले थे

मिरी गुम-गश्तगी मेरे लिए छत बन गई वर्ना
ये दुनिया वाले मुझ को बे-ठिकाना करने वाले थे

न देते सारे मंज़र अक्स ही थोड़े से दे देते
हम आवारा कहाँ तज़ईन-ए-ख़ाना करने वाले थे

समुंदर ले गया हम से वो सारी सीपियाँ वापस
जिन्हें हम जमअ कर के इक ख़ज़ाना करने वाले थे

'ज़फ़र' बे-ख़ानमाँ अपने को ख़ुद ही कर लिया तुम ने
ये कार-ए-ख़ैर तो अहल-ए-ज़माना करने वाले थे