उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jism se ho ke par aae hum

जिस्म से हो के पार आए हम

جسم سے ہو کے پار آئے ہم

शायर: Gayatri Mehta6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस्म से हो के पार आए हम
रूह बिस्तर पे हार आए हम

ले के दिल में ग़ुबार आए हम
देख पर्वरदिगार आए हम

उन से मिलने की बे-क़रारी थी
मिल के भी बे-क़रार आए हम

इक भरोसा दिलाने की ख़ातिर
शर्म अपनी उतार आए हम

आख़िरी बार मिल के आए तो
उस को दिल से उतार आए हम

अब के हम लौट कर कहाँ जाएँ
घर से हो के फ़रार आए हम