उर्दू शायरी · ग़ज़ल

badalte pal mein hum mahram nahin hain

बदलते पल में हम महरम नहीं हैं

بدلتے پل میں ہم محرم نہیں ہیں

शायर: Gayatri Mehta5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बदलते पल में हम महरम नहीं हैं
तेरे जैसे तो कम से कम नहीं हैं

मनाना भी तुम्हें जी जान से है
ख़फ़ा करने में भी हम कम नहीं है

गुनाहों को तिरे दे दें मुआ'फ़ी
ख़ुदा है वो कि देखो हम नहीं हैं

लुटा कर तेरे हिस्से की मोहब्बत
मेरी आँखें ज़रा भी नम नहीं हैं

मुझे सीने से अपने तुम लगा लो
जुदा होने के ये मौसम नहीं हैं