उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jism gher leti hai phir bhi zard tanhai

जिस्म घेर लेती है फिर भी ज़र्द तन्हाई

جسم گھیر لیتی ہے پھر بھی زرد تنہائی

शायर: Osama Khalid4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस्म घेर लेती है फिर भी ज़र्द तन्हाई
तितलियों में दिन गुज़रा जुगनुओं में रात आई

चाँदनी की बाँहों में गुमरही का बिच्छू है
और उस के दामन में मेरे दिल की बीनाई

दिल के सारे दरवाज़े बंद थे उदासी पर
कल फिर एक रक़्क़ासा खिड़कियों से घुस आई

ऐ मताअ'-ए-जिस्म-ओ-जाँ चश्म-ए-तर की नौहा-ख़्वाँ
तू मिरी ख़ुशी अपने ख़्वाब बेच कर लाई