उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jise bola tha kanTe toD Dale

जिसे बोला था काँटे तोड़ डाले

جسے بولا تھا کانٹے توڑ ڈالے

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिसे बोला था काँटे तोड़ डाले
उसी ने फूल-पत्ते तोड़ डाले

तुम्हारे बा'द जिगरी दोस्तों ने
हमारे दिल के टुकड़े तोड़ डाले

क़फ़स की तीलियों में चोंच मारी
फिर उस चिड़िया ने अंडे तोड़ डाले

जो तेरे सहन से लाता था मिट्टी
उसी ने मेरे गमले तोड़ डाले

मैं उस दरिया पे कैसे घर बनाऊँ
जो अपने ही किनारे तोड़ डाले

वो अपना शौक़ से ग़ुस्सा उतारे
मिरे घर में जो चाहे तोड़ डाले

गया था मैं तो तरकश तोड़ने को
मिरे गुलदान किस ने तोड़ डाले

तिरी आवाज़ के नश्शे में हम ने
दरीचों तक के शीशे तोड़ डाले