उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jis taraf jaoge ek shor sunai dega

जिस तरफ़ जाओगे इक शोर सुनाई देगा

جس طرف جاؤ گے اک شور سنائی دے گا

शायर: Badiuzzaman Khawar8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस तरफ़ जाओगे इक शोर सुनाई देगा
कहीं लेकिन कोई चेहरा न दिखाई देगा

जाने क्या हाल निगाहों का वो लम्हा कर दे
जब न कुछ तेरे सिवा मुझ को दिखाई देगा

डूबते वक़्त की आवाज़ हूँ कर लो महफ़ूज़
फिर मिरे बा'द ये नग़्मा न सुनाई देगा

हाथ फैलाते हुए इस लिए डर लगता है
क्या करूँगा वो अगर मुझ को ख़ुदाई देगा

रात को प्यार की सौग़ात मिली है जिस से
सुब्ह होगी तो वही ज़ख़्म-ए-जुदाई देगा

इतना चुप-चुप जो पड़ा है तो ग़नीमत जानो
दिल को छेड़ोगे तो सौ तरह दुहाई देगा

रूह के साथ मैं उड़ जाऊँगा जाने किस ओर
जब मुझे क़ैद-ए-बदन से वो रिहाई देगा

हाथ खोए हैं तो क्यों ढूँड रहे हो 'ख़ावर'
क्या तुम्हें घोर अंधेरे में सुझाई देगा