उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jin ke hathon mein sar hamare hain

जिन के हाथों में सर हमारे हैं

جن کے ہاتھوں میں سر ہمارے ہیں

शायर: SabeenSaif13 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिन के हाथों में सर हमारे हैं
वो हमें जान से भी प्यारे हैं

मत फ़लक पर हमें तलाश करो
हम तो टूटे हुए सितारे हैं

'क़ैस'-ओ-'फ़रहाद'-ओ-हीर की सूरत
'इश्क़ ने कितने रूप धारे हैं

ग़ौर कीजे ज़रा तो हम और आप
एक दरिया के दो किनारे हैं

लाख कुछ भी कहे हमें दुनिया
हम हैं उन के तो वो हमारे हैं

भूक इफ़्लास रंज मायूसी
ज़िंदगी तेरे इस्ति'आरे हैं

तेरी चाहत में 'इश्क़ की बाज़ी
जीत जाने के बा'द हारे हैं

तुझ को खोना तुझे ख़फ़ा करना
ये ख़सारे बड़े ख़सारे हैं

काश कोई कभी कहे हम से
जान हम आज भी तुम्हारे हैं

जिन में ख़ुशियाँ नसीब होती हैं
हम ने वो दिन कहाँ गुज़ारे हैं

हम ने दुनिया में आ के देख लिया
आप दुनिया में सब से प्यारे हैं

वो मिरी जान के हुए दुश्मन
जिन के सदक़े कभी उतारे हैं

मैं ने काग़ज़ पे जो लिखे थे 'सबीन'
कुछ मज़ामीन इन में न्यारे हैं